बसंत पंचमी

फूल खिले मदमस्त हुए भौरे

कलिया महकी चिड़िया चहकी

मुस्करा गए जन-मानस

चंहु ओर हरियाली छायी

वसंत ऋतु प्यारी आयी

बसंत पंचमी को श्री पंचमी और ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। यह त्यौहार माघ के महीने में शक्ल पंचमी के दिन मनाया जाता है। पूरे वर्ष को 6 ऋतुओं में बाटा जाता है जिसमें वसंत ऋतु ग्रीष्म ऋतु वर्षा ऋतु शरद ऋतु हेमंत ऋतु और  ऋतु शामिल है।

इस सभी ऋतुओं में से वसंत को सभी ऋतुओं का राजा माना जाता है। इसी कारण  इस दिन को बसंत पंचमी कहा जाता है। इस ऋतु में खेतों में फसलें लहलहा उठती है और फूल खिलने लगते है एवम् हर जगह खुषहाली नजर आती हैं । चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठण्ड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। यदि सेहत की दृष्टि से देखा जाए तो यह मौसम बहुत अच्छा होता है। इंसानों के साथ-साथ पशु पक्षियों को भी नई चेतना का संचार होता है। हिन्दू मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की विशेष पु का विधान है। बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती से विद्या, बुद्धि कला एवं ज्ञान का वरदान मांगा जाता है।

 माँ सरस्वती सभी को विद्या बुद्धि से परिपूर्ण करे इसी कामना के साथ आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

माही सेन

कक्षा – 6