कविता 

पायल की छन-छन से छनकेए खनके बन कंगन।
ओंस की बूँदें है, हम लड़की मन है एक दर्पण।।
हम से है घर बार तुम्हारा, हमसे है आँगन।
ओंस की बूँदे है,ख् हम लड़की मन है एक दर्पण।।
रिष्ते है, वो पेंम कि, जिसमें हम तस्वीर सजाते है।
हाथों की खाली रेखाओं पर, किस्मत हम बनाते है।।
हम से महकना है, बपचन और सजता है यौवन।
ओंस की बूँदे हम लड़की है, मन है एक दर्पण।।
कभी गीत है, कभी गजल है और कभी श्रंगार।
औस की बूँदे हम लड़की है मन है एक दर्पण।।
हम लक्ष्मी है, हम दुर्गा, हम वाणी अवतार।
चाँद सितारे छू आये हम तोड़ के हर बंधनवार।।
हम ही है वो माँ जिसने इस दुनियाँ को बनाया।
पत्नी, भाभी, बहना बेटी के रिष्तों से सजाया।।
मत रोदों हम कलियों को मिट जायेगा उपवन।
ओंस की बूँदे है हम लड़की, मन है एक दर्पण।। 

रोषनी सकारे, 
सृष्टि बैरागी