मकर संक्रांति

हिन्दू महीने के अनुसार पौष शुक्ल में मकर सक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यह त्यौंहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता हैं। पतंग उड़ाते है, तिलगुड खाते है आदि । पर हम मकर संक्रांति का त्यौहार क्यों मनाते है इसके पीछे कई कारण होते है। तो आइए हम भी उन कारणों को जाने।
मकर संक्रांति को मुख्यतः सूर्य पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य राषि से मकर राषि में प्रवेष करता हैं। एक राषि को छोड़कर दूसरी राषि में प्रवेष करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते है चूँकि सूर्य मकर राषि में प्रवेष करता है इसलिए इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते है। चूँकि सूर्य मकर राषि में प्रवेष करता है इसलिए इस समय का मकर संक्रांति कहते है।
दूसरा कारण इस दिन सूर्य दक्षिणायन से अपनी दिषा बदल कर उत्तरायण हो जाता है, अर्थात सूर्य उत्तर दिषा की ओर बड़ने लगता है जिससे दिन की लंबाई बड़ती और रात की लंबाई छोटी होनी षुरू हो जाती है, अतः मकर संक्रांति को उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। 
पतंग क्यो उठाई जाती है? सुबह सूर्य उद्य के साथ ही पतंग उडाना षुरू हो जाता है पतंग उडाने के पीछे कुछ मुख्य कारण है की कुछ घंटे सूर्य के प्रकाष में बिताना। यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह के सूर्य का प्रकाष षरीर के लिए स्वास्थ्य वर्धक और त्वचा एवं बुद्धि हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता हैं। तिल गुड़ से बने लड्डू क्यो खाये जाते है। सर्दीयों के मौसम में वातावरण का तापमान बहुत ही कम होने के कारण शरीर में रोग व बीमारियाँ जल्दी लगती है। इनमें गर्मी पैदा करने वाले तत्च और लाभदायक पोषाक पदार्थ भी होता है। इसलिए इस दिन गुड़ से बने लड्डू खाए जाते है।